कृषि बीज का अर्थ (Meaning of Agriculture Seed):-
बीज(Seed):-
पौधे का वह जीवित भाग (जैसे- पत्ती,तना,जड़ आदि)जो अपने सदृश पौधे को जन्म देने कि क्षमता रखता हैैैै बीज कहलाता है।
बीज क्या होता है ? सामान्य शब्दों में कह सकते हैं कि बीज पौधों का वह भाग(अंग) होता है जिसमें पौधों के प्रजनन (जन्म देने)की क्षमता होती है तथा जो मृदा के सम्पर्क में वा अनुकूलित वातावरण(जैसे- नमी, ताप आदि) होने पर एक नये पौधे को जन्म देता हो।
कृषि की दृष्टि से देखा जाये तो बीज का अर्थ पौधों के उन सभी भागों (जैसे- जड़, तना, कन्द, पत्ती,शाखा व फल आदि) से है जिसका प्रयोग हम पौध उगाने या फसल उत्पादन के लिए प्रयोग में लाते है तथा जिसमें अपने समान ही सन्तान (पौधा) उत्पन्न करने क्षमता होती है ; बीज (Seed) कहलाता हैं।
कृषि मे बीज का महत्व (Importance of Agriculture seed):-
कृषि में अधिक उत्पादन तथा अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए अन्य सभी कारकों की तुलना में बीजों का विशेष महत्व है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कृषि उत्पादन का मूल आधार बीज ही हैं।चाहे कितने भी अच्छी भूमि की किस्में हो, चाहे कितनी ही उन्नत सस्य क्रियाएं जैसे- खाद व उर्वरक प्रबंध, सिंचाई प्रबंधन हो या चाहे कितनी भी अच्छी फसल प्रबंधन की क्रिया क्यों न की जाए ये सभी क्रियाएँ एक अच्छे बीज के अभाव में बोना हानि ही साबित होता हैं। कृषि में अच्छे तथा उन्नत किस्म के बीजों के उपयोग से ही कृषक अपनी फसल उत्पादन में लगभग 15-20% तक का वृद्धि कर सकता है।कृषि बीज के प्रकार |
बीज के प्रकार(Types of Agriculture Seed) :-
बीजों को अनेक आधार से बांटा जा सकता है -
अ.पीढ़ी के आधार पर(Generation System):-
1. प्रजनक बीज (Breeder Seed) :-
प्रजनक बीज का उत्पादन मूल बीज द्वारा किए जाते हैं। इनकी आनुवंशिक गुणवत्ता अधिक होती है। यह बीज भी प्रजनन द्वारा तैयार किया जाता है। जनक बीज को बोने पर 5 से 6 वर्षो तक आनुवंशिक शुद्धता बनी रखती है। यह भी प्रथम श्रेणी का बीज होता है एवं इस बीज के थैले पर पीला टैग लगा होता हैं।
क. केंद्रक बीज (Nucleus Seed) :-
यह प्रथम श्रेणी के बीज होते हैं। संस्करण (Hybridization), म्यूटेशन (Mutation) एवं वरण (Selection) विधि से जो बीज प्राप्त होता है उसे केंंद्रक बीज कहते। यह बीज प्रजनन द्वारा उत्पादित किया जाता है इस बीज में सभी आवश्यक आनुवंशिक लक्षण उपस्थित होते हैं। केेंद्रक बीज की आनुवंशिक शुद्धता(Genetic purity) 100 प्रतिशत रहती है। इस बीज की आनुवंशिक शुद्धता ज्यादा होनेे के कारण यह बहुत महंगे होते हैं।
2. आधार बीज (Foundation Seed) :-
इस बीज का उत्पादन भी जनक बीज के द्वारा ही किया जाता है। आधार बीज आनुवंशिक शुद्धता की दृष्टि से द्वितीय श्रेणी के बीज माने जाते हैं। जनक बीजों के परीक्षण अथवा संवर्धन के समय इन बीजों मे कुछ आनुवंशिक शुद्धता कम हो जाती है लेकिन इन बीजों में मानक के अनुरूप आनुवंशिक शुद्धता बनी रहती हैं। आधारित बीज के पैकेट पर सफेद टैग लगा होता है।
3.पंजीकृत बीज (Registered Seed):-
इस बीज का उत्पादन आधार बीज अथवा पंजीकृत बीज से ही किसी भी प्रमाणीकरण संस्था की देखरेख में किया जाता है जिससे बीज गुणवत्ता संतोषजनक बनी रहे कुछ संस्थाओं (Institutes) के द्वारा कुछ फसलों के लिए इसका प्रयोग प्रमाणित बीज उत्पादन के लिए किया जाता है अधिकतर आधार बीज को ही प्रमाणित बीज उत्पादन के लिए प्रयोग किया जाता है । अतः यहाँ बीज का यह वर्ग नहीं पाया जाता है ।
हमारे देश में बीज का यह वर्ग प्रचलन में नहीं है ।
4.प्रमाणित बीज (Certified Seed):-
प्रमाणित बीज का उत्पादन आधारित बीजो के द्वारा ही किया जाता है। यह बीज तृतीय स्तर का होता है। जिसका उपयोग अधिक पैमाने पर किसानों के द्वारा फसल उत्पादन के लिए किया जाता है। इस बीज के थैले पर नीला टैग लगा होता हैं।
5. सत्य बीज (Truthful Seed) :-
सत्य बीज किसी बीज प्रमाणीकरण संस्था द्वारा प्रमाणित नहीं होता है। इस बीज की आनुुुुवंशिक क्षमता तथा भौतिक शुद्धता मानकों के आधार पर होती है लेकिन आनुवंशिक गुणवत्ता पर सदैव शंका बनी रहती है इसलिए इसे निम्न स्तर का बीज भी कहा जाता है।
6. उपमानक बीज (Sub-standard Seed) :-
बीज उत्पादन के समय मौसम की विपरीत परिस्थितियां
उन्नत बीजों के गुणवत्ता के अनुरूप नहीं हो पाती है तथा इसमें कुुछ भौतिक ( Physical ) व आनुवंशिक (Genetic ) है तो ऐसे बीजों को उपमानक बीज कहते हैं। ऐसी स्थिति में निम्न गुणवत्ता वाले बीजों को ही मानकों के अनुरूप प्रमाणित संस्था द्वारा प्रमाणित कर दिया जाता है।
ब. प्रजनन के आधार पर (Reproduction Method):-
प्रजनन विधि के आधार पर बीज दो प्रकार के होते हैं-
1. लैंगिक जनन से उत्पन्न बीज (Sexually Reproduced Seeds):- ऐसे बीज जो निषेचन के बाद भ्रूण से विकसित होते हैं, ऐसे स्तर के बीज में परिभाषित बीज आते हैं।
2. अलैंगिक जनन से उत्पन्न बीज (Asexually Reproduced Seeds):- फसल को उगाने के लिए बीज के अलावा अन्य पौध सामग्री (वानस्पतिक भाग),जैसे - पत्ती ,तना , जड़ आदि उपयोग म लाया जाता है , तो वह भी बीज ही कहलाता है; जैसे -
क. भूमिगत तना(Underground Stems)-:
(i).शल्क कंद (Bulb)- लहसुन, प्याज आदि।
(ii).प्रकंद (Rhizome)- हल्दी, अदरक आदि।
(iii). घनकंद (Corm)- जिमीकन्द, अरवी आदि।
ख.अर्द्धवायवीय तना ( Sub-aerial Stems )-:
(i).उपरिभूस्तारी (Runner)- दूब, घास आदि ।
(ii).अन्तःभूस्तारी (Sucker)- गुलदाउदी, पोदीना आदि ।
(iii).भूस्तारिका (Offset)- सिंघाड़ा, जलकुंभी आदि।
(iv).भूस्तारी (Stolon)- स्ट्राबेरी।
ग.पत्तियाँ(Leaves)-: दर्दमार , बिगोनिया आदि ।
घ. पत्र प्रकलिका(Bulbils)-: रतालू , लहसुन आदि ।
ङ. असंग जनित बीज(Apomictic Seeds)-: आम, तम्बाकू आदि।
च. कृत्रिम प्रवर्धन(Artificial Propagation)-:
(i)जड़ कलमें(Root cuttings)- संतरा, नींबू आदि।
(ii)तना कलमें(Stem cuttings)- शकरकंद, गन्ना आदि।
(iii)चश्मा चढ़ाना(Budding)- गुलाब।
(iv)कलम बंधन(Grafting)- लीची, आम।
(v)दाब लगाना (Layering)- गुलाब, अंंगूर, नींबू आदि।
(vi)गूटी(Gootee)- नींबू, रबड़ आदि।
द.भण्डारण क्षमता के आधार पर(Storability):-
राबर्ट्स(Roberts),1973 ने बीजों को उनकी भण्डारण क्षमता के आधार पर दो समूहों (सरल व अड़ियल बीज) में बांटा है। एलिस व अन्य(Ellis and Others),1990 ने बीजों का एक मध्यवर्ती(Intermediate) वर्ग सुझाया है।बोनर(Bonner),1990 ने सरल एवं अड़ियल बीजों को उप- वर्गों सत्य सरल, सम सरल, शीतोष्ण अड़ियल व उष्ण अड़ियल में विभाजित किया है।
Superb
जवाब देंहटाएंThanks ❤️
हटाएं❤️
जवाब देंहटाएंMxt
जवाब देंहटाएं❤️
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